शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक अच्छा नागरिक और सच्चा मनुष्य बनना है। : आचार्य देवव्रत

हिन्द न्यूज़, तापी

      तापी प्रवास के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि, शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक अच्छा नागरिक और सच्चा मनुष्य बनना है।

तापी ज़िले के उच्छल में आज गुजरात विद्यापीठ द्वारा आयोजित “स्वदेशी ग्रामजीवन स्वावलंबन यात्रा” कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामवासियों से संवाद किया। 

पूज्य बापू का ‘स्वदेशी’ का नारा केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा को जीवित रखने का मार्ग था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ अभियान उसी स्वदेशी भावना का पुनर्जागरण है। जब हम स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे, तब भारत सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर बनेगा।

प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का मार्ग है। गाय, भूमि और पर्यावरण ही हमारे जीवन के तीन आधारस्तंभ हैं। प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ेगी, जल स्तर सुधरेगा और मानव स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा।

विद्यार्थी अपने गांवों में जाकर माता-पिता और किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करें, ताकि गांव आत्मनिर्भर बनें और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो।

भारत की समृद्धि की जड़ें शहरों में नहीं, बल्कि गांवों के स्वावलंबन में निहित है। जब प्रत्येक गांव स्वसंपन्न बनेगा, तभी भारत विश्वगुरु बनेगा।

मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव, अतिथिदेवो भव, यही हमारे जीवन के चार आधार हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर उनके आदर्शों का स्मरण किया। राष्ट्र के लिए सेवा, समर्पण और त्याग ही सच्चा धर्म है।

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