हिन्द न्यूज़, दिल्ली
भ्रामरी शब्द भ्रमर से लिया गया है, जिसका अर्थ है भौंरा। इस प्राणायाम के अभ्यास के दौरान निकलने वाली ध्वनि भौंरे के गुंजन जैसी होती है, इसीलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है।
भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास व्यक्ति को तनाव से मुक्त करता है तथा चिंता, क्रोध और मानसिक अतिसक्रियता को कम करने में सहायक होता है। भौंरे जैसी ध्वनि का प्रतिध्वनिक प्रभाव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
यह एक महत्वपूर्ण शांतिकारक प्राणायाम है, जो तनाव संबंधी विकारों के प्रबंधन में उपयोगी सिद्ध होता है। साथ ही यह एकाग्रता और ध्यान की दिशा में एक उत्कृष्ट आरंभिक अभ्यास है।
