गाय हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है : आचार्य देवव्रत

हिन्द न्यूज़, तापी 

     तापी जिले की उच्छल तहसील स्थित माणेकपुर गांव में आज सुबह का अनुभव अत्यंत प्रेरणादायक रहा। : आचार्य देवव्रत

      ग्राम्य जीवन की सादगी और आत्मीयता का अनुभव करते हुए गांव के किसान रतिलालभाई रेवजीभाई वसावा के घर पहुंचकर आचार्य देवव्रत जे गाय दुही। यह केवल एक परंपरा का पालन नहीं, बल्कि ‘गौसेवा’ के माध्यम से प्रकृति और जीवन के प्रति आस्था का प्रतीक है।

गाय हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की कृषि और स्वास्थ्य संस्कृति की ‘मातृशक्ति’ है। गाय का दूध, मूत्र और गोबर तीनों ही मानव जीवन को निरोगी और प्रकृति को पवित्र बनाते हैं।


तापी जिले की उच्छल तहसील स्थित माणेकपुर गांव में आज प्राकृतिक खेती को समर्पित एक अत्यंत प्रेरणादायक दिन रहा।

प्राकृतिक खेती कर रहे किसान श्री रतिलालभाई रेवजीभाई वसावा के खेत का दौरा कर, हल चलाया और भूमि की उर्वरता बढ़ाने के अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर खेत में वृक्षारोपण भी किया।

किसानों के साथ आत्मीय संवाद किया। बैलगाड़ी चलाने का भी अवसर मिला। प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का मार्ग है। गाय-आधारित खेती ही धरती की सेहत, जल संरक्षण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है।

प्राकृतिक खेती के माध्यम से कम लागत में अधिक उत्पादन और स्वस्थ जीवनशैली संभव है – जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करती है।

गुजरात के हजारों किसान इस आंदोलन से जुड़कर धरती माता को पुनः उपजाऊ बना रहे हैं, यह सच्चे अर्थों में भारत की कृषि क्रांति है।

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